पढ़िए कैसे, दलितों के आगे झुके प्रशासन और सवर्ण

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हिसार। हिसार के सब डिवीजन हांसी के गांव भाटला में 15 जून को सार्वजनिक हैंडपंप से पानी भरने को लेकर दलित और ब्राह्मण लड़कों के बीच झगड़ा हुआ. दलित समुदाय ने जब मारपीट और झगड़े की शिकायत पुलिस थाने में की तो ब्राह्मणों ने उनका सामाजिक बहिष्कार कर दिया. ब्राह्माणों ने दलितों के गली में चलने से, पशुओं को खेत में चराने से, तालाब में पशुओं को पानी पीने से रोक दिया. एक तरह से दलित समुदाय के लोगों का किसी भी सार्वजनिक जगह पर जाने से प्रतिबंध लगा दिया.

इस सामाजिक बहिष्कार का दलित समुदाय ने हांसी के अम्बेडकर चौक पर विरोध प्रदर्शन किया. दलित समाज के लोग और संगठन आरोपियों के खिलाफ एससी-एसटी एक्ट के तहत भी मामला दर्ज करके सभी आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग पर अड़ गए. उस पर भी न तो कोई पुलिस आई और न ही कोई अधिकारी. इसी मांग को लेकर अब दलित समाज के लोगों ने हांसी में भूख हड़ताल भी शुरू कर दी है.

डॉ. अम्बेडकर स्टूडेंट फ्रंट ऑफ इंडिया(डीएसएफआई) के छात्र मनोज अठवाल ने दलित दस्तक को घटना के बारे बताया. मनोज ने कहा कि ब्राह्मण और जाट समुदाय के लड़कों ने दलित लड़कों से मारपीट की. यह मारपीट सार्वजनिक हैंडपंप से पानी भरने के लिए हुई. ब्राह्मण और जाट लड़कों ने दलितों को पानी भरने नहीं दे रहे थे. दलित लड़कों ने जब इसका विरोध किया तो ब्राह्माण और जाट लड़के दलित लड़कों से मारपीट करने लगे.

अठवाल ने कहा कि जब दलित समुदाय के लोग घायल लड़कों को अस्पताल लेकर जा रहे थे तो सरपंच प्रतिनिधि ने उन्हें अस्पताल जाने से भी रोका. वैसे तो गांव की सरपंच सुदेश देवी हैं, लेकिन उनका पति पुनीत प्रतिनिधि की भूमिका निभाता है. पुनीत ने दलित समुदाय पर समझौता करने का दबाव भी बनाया. जब दलितों ने समझौता करने से मना कर दिया तो पुनीत ने गांव से उनकार सामाजिक बहिष्कार कर दिया.

दलितों ने इसके खिलाफ पुलिस को एससी-एसटी एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज करने को लेकिन पुलिस अधिकारी ने कोई मुकदमा दर्ज नहीं किया. फिर दलित समुदाय ने नेशनल अलायन्स फॉर दलित ह्यूमन राइट्स के संयोजक रजत कल्सन के नेतृत्व में विरोध प्रदर्शन शुरू किया. दो दिन तक अम्बेडकर चौक पर धरना दिया कोई भी पुलिस अधिकारी नहीं आया.

रजत कल्सन के अलावा डीएसएफआई के मनोज अठवाल, चौ. देवीलाल चौधरी के डीएसएफआई के अध्यक्ष विक्रम अटल और गांव के तीन दलित लड़के भूख हड़ताल पर बैठ गए. शुरूआत में प्रशासन ने विरोध कर रहे दलितों को कोई सुरक्षा और एंबुलेंस मुहैया नहीं कराई. भूख हड़ताल के चौथे दिन पुलिस प्रशासन दलितों को कथित तौर से मनाने के लिए आया. दलितों का विरोध प्रदर्शन खत्म करने और समझौता करने के लिए ब्राह्मणों और जाटों ने गैर कानूनी तरीके से धरने पर भी बैठे. लेकिन दलितों ने कहा कि जब तक उनकी मांग पूरी नहीं होगी तब तक भूख हड़ताल और विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा. पांचवे दिन पुलिस प्रशासन और ग्राम प्रधान ने दलितों की मांगों का मान लिया और दलितों ने विरोध प्रदर्शन समाप्त कर दिया.

दलित समुदाय ने मांग की थी कि एससी-एसटी एक्ट के तहत आरोपियों पर मुकदमा दर्ज हो. प्रशासन ने प्रधान सहित 7 लोगों पर एससी-एसटी एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया है. एक्ट के तहत पीड़ितों को 25-25 हजार की राशि देने का वायदा किया. प्रशासन ने उनकी बात को मानते हुए 60 ब्राह्मण और 1 जाट को गिरफ्तार किया है.

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