खेलमंत्री चेतन चौहान की विधानसभा में दलित गांव से बड़ा भेदभाव

अमरोहा। दलितों को परेशान करने के लिए सरकार अलग-अलग तरीके ढूढ़तीं रहती है. कभी दलितों से छुत-पात किया जाता है तो कभी उन्हें सरकारी सुविधाओं से वंचित करने के मामले सामने आते हैं. ताजा घटना उत्तर प्रदेश के अमरोहा जिले की है जहां प्रशासन का कई सालों से किया भेदभाव संज्ञान में आया है. बता दें की अमरोहा जिले में कुल चार विधानसभा हैं जो क्रमश: हसनपुर, धनौरा, अमरोहा व नौगांवा है.

असल में मामला यह है की मुबारकपुर कलां नाम के एक गांव का है जोकि हसनपुर विधानसभा मुख्यालय, तहसील हसनपुर से मात्र 200 मीटर दूर झकड़ी रोड पर बसा है पर इसे राजनीति और भेदभाव के कारण 40 किलोमीटर दूर नौगांवा विधानसभा में डाल दिया गया है. बता दें 3000 हजार से अधिक जनसंख्या वाले मुबारकपुर कला गांव में सभी ग्रामवासी दलित वर्ग से आते हैं. यह गांव आस पास के कई किलोमीटर के गावों में दलित आबादी में पहले स्थान पर है पर विकास के नाम पर यहां आजादी के 70 वर्षों में कुछ नहीं हुआ. दलित बहुल्य होने के कारण इस गांव से भेदभाव बड़े पैमाने पर जारी है. यह गांव हसनपुर विधानसभा से एकदम सटा हुआ है जिस कारण गांव के लोग इसे हसनपुर नगर पालिका में शामिल करने की मांग वर्षों से कर रहे हैं. उन्हें उम्मीद थी कि इससे गांव का विकास हो सकता है. लेकिन प्रशासन के नुमाईंदों ने इस गांव के साथ इतना बड़ा मजाक किया कि उसे सुनकर हर कोई चौक रहा है.

असल में हसनपुर से चालीस किमी दूर स्थित नौगांवा सादात कस्बे के नाम पर कुछ नेताओं ने अधिकारियों से सांठ-गांठ करके विधानसभा सीट में अपनी मर्जी से गांवो को जुड़वा दिया है, जिसके लिए परिसीमन में पूरी कोताही बरती गयी. हसनपुर विधानसभा सीट से मात्र 200 मीटर दूरी होने के बाद भी गांव को नौगांवा सादात में जबरदस्ती जोड़ दिया गया. पहले से भेदभाव के शिकार दलितों के इस गांव के लोगों को परेशान करने का एक यह निराला ढंग खोजा गया.

सरकारी सुविधाओॆ के मामले में इस गांव का बुरा हाल है. गांव में टूटी सड़कें, जलभराव, बिजली, पानी की समस्याऐं गांव की बदहाली को हर ओर से बयां कर रहीं हैं. पर गांव के गरीब दलित हर बार चुनाव में वोट मांगने वालों द्वारा ठगे जाते रहे हैं. इस बार नौगांवा विधानसभा सीट से उत्तर प्रदेश के खेल मंत्री चेतन चौहान विधायक हैं जो भारत के मशहूर क्रिकेटर भी रहे हैं पर गांव से मंत्री जी की दूरी पहले विधायको की तरह ही है. न सड़के बनी है न ढंग की बिजली है और कोई परेशानी हो तो गांववालो को 40 किमी दूर शिकायत करने जाना पड़ता है. इसलिए गांव वालो की सबसे पहली पहली मांग गांव को हसनपुर विधानसभा से जोड़ने की हैं जिससे उन्हें उपेक्षा और भेदभाव से मुक्ति मिल सके.

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