अम्बेडकर विवि, लखनऊ ने आठ दलित छात्रों को निष्कासित किया, छात्रों ने विवि पर लगाया गंभीर आरोप

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बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय में आठ छात्रों को निष्कासित कर दिया गया है. साथ ही आठों छात्रों को तत्काल हॉस्टल छोड़ने का भी फरमान सुना दिया है. विश्वविद्यालय का कहना है कि उसने इन छात्रों पर जनसंपर्क विभाग के डायरेक्टर प्रो. कमल जयसवाल पर हमला करने के आरोप में कार्रवाई की है, जबकि दलित छात्रों का आरोप है कि प्रोफेसर जयसवाल और उनके साथ के कुछ छात्रों ने उनके साथ मारपीट की और उन्हें जातिसूचक गालियां दी.

अपने फैसले में विश्वविद्यालय प्रशासन ने इस कार्रवाई की वजह बताते हुए कहा है कि प्रो. जयसवाल और डॉ. आर.के साहू (ए.आर. स्टोर एंड परचेज) पर 7 सितंबर को 9 बजे के करीब उन छात्रों ने हमला किया. इसके बाद गुरुवार 8 सितंबर को छात्रों पर कार्रवाई का आदेश जारी कर दिया गया. दूसरी ओर निष्कासित छात्र इस फैसले को जातिगत भेदभाव बता रहे हैं, उनका कहना है कि प्रो. जयसवाल शुरू से ही दलित छात्रों को पसंद नहीं करते हैं. निष्कासित छात्रों का कहना है कि वे 13 सितंबर को दिल्ली में मानव संसाधन विकास मंत्रालय में विश्वविद्यालय के इस भेदभाव पूर्ण फैसले के खिलाफ शिकाय करेंगे और विरोध प्रदर्शन करेंगे. निष्कासित छात्रों ने अपने ऊपर कार्रवाई के एक दिन पहले ही सात सितंबर को विश्वविद्यालय प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाया था. साथ ही अनुसूचित जाति आयोग सहित संबंधित मंत्रालय और विभागों से भी न्याय की गुहार लगाई थी. विश्वविद्यालय की इस कार्रवाई से छात्रों में रोष है और वह सकते में है.

निष्कासित किए गए छात्रों के नाम
(1) श्रेयात बौद्ध (एम.ए इतिहास)

(2) संदौप गौतम (बी.एड)

(3) जय सिंह (बी.एड)

(4) रमेन्द्र नरेश (बी.एड)

(5) अजय कुमार (पी.एच.डी स्कॉलर, केमेस्ट्री)

(6) संदीप शास्त्री (एम.ए, इतिहास)

(7) अश्विनी रंजन (फोरेंसिक साइंस)

(8) सुमित कुमार (फोरेंसिक साइंस)

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