समलैंगिक था अलाउद्दीन खिलजी

Padmavati

संजय लीला भंसाली की फिल्म पद्मावती से दिल्ली सल्तनत के बादशाह अल्लाउद्दीन मोहम्मद खिलजी को लेकर विवाद छिड़ गया है. रानी पद्मावती की जो कहानी सबसे लोकप्रिय है वो मलिक मोहम्मद जायसी की रचना पद्मावत पर आधारित है. जायसी के पद्मावत मेवाड़ की रानी पद्मावती को पाने के लिए दिल्ली के सुल्तान खिलजी द्वारा किए गये आक्रमण की कहानी है. पद्मावती का पति और मेवाड़ का राजा रतन सिंह युद्ध में वीरगति को प्राप्त होता है. खिलजी के हाथों में पड़ने से बचने के लिए रानी पद्मावती जौहर कर लेती हैं. इस तरह खिलजी युद्ध जीतकर भी पद्मावती को हासिल नहीं कर पाता. बहुत से लोग पद्मावत की कहानी को काल्पनिक मानते हैं. भंसाली की फिल्म की कहानी एक दिसंबर को उसके रिलीज होने के बाद ही सामने आएगी और तभी पता चल सकेगा कि उसमें कितना सच है और कितना फसाना. अभी हम आपको खिलजी के जीवन से जुड़े कुछ ऐसे तथ्य बताएंगे जो ऐतिहासिक माने जाते हैं.

अल्लाउद्दीन खिलजी का असली नाम और जन्म- अल्लाउद्दीन खिलजी के जन्म की ठीक-ठीक तारीख का पता नहीं चलता है. कुछ इतिहासकार उसका जन्म सन् 1250 में मानते हैं. लेकिन 16वीं-17वीं सदी के लेखक हाजी-उद-दबीर ने लिखा है कि खिलजी जब 34 साल का थ तो उसने रणथंभोर पर चढ़ाई की थी. खिलजी ने सन् 1300-01 में रणथंभोर पर हमला किया था. इस आधार पर माना जाता है कि उसका जन्म सन् 1266-67 में हुआ होगा. खिलजी का असली नाम अली गुरशस्प था. खिलजी वंश के पहले शासक जलालुद्दीन खिलजी उसके चाचा थे.

ससुर और चाचा को मारकर हासिल की गद्दी- जलालुद्दीन खिलजी ने अपनी बेटी मल्लिका-ए-जहां की शादी भतीजे अल्लाउद्दीन खिलजी से की थी. जलालुद्दीन ने सन् 1291 में अल्लाउद्दीन को वर्तमान उत्तर प्रदेश में स्थित कड़ा रियासत का अमीर नियुक्त किया था. अल्लाउद्दीन की महत्वाकांक्षा केवल अमीर बनने तक सीमित नहीं रही. उसने तय कर लिया कि वो अपने चाचा और ससुर की जगह लेगा. सन् 1296 में उसने जलालुद्दीन को धोखे से मार दिया और खुद को दिल्ली सल्तनत का सुल्तान घोषित कर दिया. इस तरह वो 1296 में खिलजी वंश का दूसरा शासक बना. खिलजी सन् 1316 में अपनी मृत्यु तक दिल्ली का सुल्तान रहा.

खिलजी की पत्नियां- खिलजी की पहली पत्नी मल्लिका-ए-जहां उसके चाचा और खिलजी वंश के पहले संस्थापक जलालुद्दीन की बेटी थी. माना जाता है कि मल्लिका अल्लाउद्दीन को बहुत ज्यादा तवज्जो नहीं देती इसलिए दोनोें के बीच संबंध मधुर नहीं थे. अल्लाउद्दीन की दूसरी पत्नी महरू थी जो उसके सिपहसालार अलप खान की बहन थी. हालांकि बाद में अल्लाउद्दीन ने तख्तापलट की आशंका में अलप खान को मरवा दिया था. खिलजी की तीसरी पत्नी गुजरात के वाघेला राजा राजा कर्ण की विधवा कमला थी. अल्लाउद्दीन की चौथी पत्नी देवगिरी के राजा रामचंद्र की बेटी क्षत्यपली थीं. अल्लाउद्दीन की सेना ने रामचंद्र को हराकर उसे अधीनता स्वीकार करने पर मजबूर कर दिया था. इनके अलावा खिलजी के हरम में सैकड़ों महिलाएं दासियों और लौंडियों के तौर पर रहती रही होंगी.

मलिक काफूर से रिश्ता- अल्लाउद्दीन खिलजी और मलिक काफूर के रिश्ते को लेकर इतिहासकारों में मतभेद है. अल्लाउद्दीन खिलजी को काफूर पर अपने किसी भी अन्य रिश्तेदार या दोस्त से ज्यादा भरोसा था ये बात सभी मानते हैं लेकिन दोनों के बीच समलैंगिक संंबंध को लेकर इतिहासकारों में मतभेद है. मलिक काफूर ने अल्लाउद्दीन खिलजी के लिए दक्षिण भारत में कई राजाओं से लड़ाई लड़ी और जीत हासिल की. माना जाता है कि खिलजी के सिपहसालार नुसरत खान ने गुजरात में एक युद्ध के बाद मलिक काफूर को गुलाम बाजार से खरीदा था. लेकिन अपनी बहादुरी और स्वामीभक्ति से वो खिलजी का दायां हाथ बन गया. हालांकि अल्लाउद्दीन खिलजी के मौत के कुछ महीनों बाद उसके मलिक काफूर की हत्या कर दी गयी थी.

जनसत्ता से साभार

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