गैर-आदिवासियों ने किया आदिवासियों की जमीनों पर कब्जा

रायगढ़। रमन सरकार छत्तीसगढ़ में आदिवासियों की जमीन हड़पने से बाज नहीं आ रही है. आदवासियों को मिलने वाली सुविधाओं पर सरकार और सरकारी कर्मचारी ऐसा पेंच फंसाते है कि आदिवासी उन सुविधाओं का लाभ ही न उठा पाए. ऐसा ही एक मामला छत्तीसगढ़ के रायगढ़ से सामने आया है. जहां आदिवासियों की जमीनों पर गैर आदिवासियों ने कब्जा कर रखा है.

प्राप्त जानकारी के मुताबिक तहसीलों से आदिवासियों की जमीन वापस करने के लिए हुए आदेश के बाद भी 320 प्रकरणों के 992 एकड़ जमीन में गैर आदिवासियों का कब्जा है. अभी तक उक्त जमीन में राजस्व विभाग के अधिकारी मूल आदिवासियों को कब्जा नहीं दिला पाए हैं. इसके कारण मूल आदिवासी तहसील से हुए आदेश की प्रति लेकर कार्यालय के चक्कर काटने को मजबूर हो रहा है, लेकिन अधिकारी इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं.

सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार जिले के 6 अनुविभाग में 3813 प्रकरण आए हैं जिसके अनुसार 1196 प्रकरण में आदिवासियों के पक्ष में निर्णय हुआ है जिसके अनुसार 2675 एकड़ जमीन वापस मूल आदिवासियों के नाम पर रिकार्ड संधारण करते हुए मौके पर कब्जा दिलाने का प्रावधान है.

इसी कड़ी में राजस्व विभाग ने महज 873 प्रकरण में 1682 एकड़ जमीन में मूल आदिवासियों को कब्जा दिला पाई है. शेष 320 प्रकरण में 992 एकड़ जमीन में आज भी गैर आदिवासियों का कब्जा है. जबकि इसमें तहसील से खाली करने के मूल आदिवासी को जमीन वापस दिलाने के लिए आदेश हो चुका है.

इसमें से कई तो ऐसे प्रकरण है जिनको निर्णय हुए करीब लंबे समय बीत गए हैं और मूल आदिवासी अपनी जीविकोपार्जन के लिए उक्त जमीन पर कृषि कार्य करने के लिए कब्जा करना चाह रहा है, लेकिन राजस्व विभाग के अधिकारियों द्वारा कब्जा दिलाने की कार्रवाई न करने के कारण वह रोज कार्यालयों के चक्कर काटने को मजबूर है.

कब्जा वापस दिलाने के लिए शेष प्रकरण पर गौर किया जाए तो दो अनुविभाग धरमजयगढ़ और घरघोड़ा का ही है. इसमें घरघोड़ा में 305 प्रकरण और धरमजयगढ़ में 15 प्रकरण लंबित है जिसमें गैर आदिवासियों से जमीन लेकर आदिवासियों को जमीन वापस दिलाना है.

जिले में इसलिए नहीं होती है कार्रवाई – आदिवासी जमीन गैर आदिवासियों द्वारा लिए जाने के बाद कई मामलों में उक्त जमीन में निर्माण कार्य कर लिया गया है. ऐसे में जब मूल आदिवासी को जमीन वापस दिलाने की बात सामने आ रही है तो विभाग के अधिकारी निर्माण कार्य को लेकर पीछे हटते हुए नजर आ रहे हैं. जिसका खामियाजा मूल आदिवासी को भुगतना पड़ रहा है.

36 सौ प्रकरण का हुआ है निराकरण- जिले के 6 अनुविभाग में कुल 3833 प्रकरण दर्ज किया गया था जिसमें से कुल 3619 प्रकरण का निराकरण किया गया है. इसमें से आदिवासियों के पक्ष में 1196 प्रकरण में निर्णय लिया गया है तो वहीं शेष 2406 प्रकरण में दूसरे पक्ष में निर्णय हुआ है. बताया जाात है कि कई में आदिवासी ने खरीदी किया है तो कई में नियमों का पालन किया गया है.

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