राज्यसभा उम्मीदवारी पर मायावती का एक तीर से दो निशान

लखनऊ।गोरखपुर और फुलपूर उपचुनाव में सपा-बसपा के साथ आने के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में कई तरह के कयास लगने शुरू हो गए थे. कहा यह भी गया कि इस गठबंधन के जरिए मायावती अपने भाई और पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष आनंद कुमार को राज्यसभा भेजना चाहती हैं. इन तमाम तरह की चर्चाओं को करारा झटका लगा है. बसपा प्रमुख मायावती ने बसपा के राज्यसभा उम्मीदवार के तौर पर एक जमीनी कार्यकर्ता के नाम की घोषणा कर के सबको चौंकाते हुए सभी अटकलों पर रोक लगा दिया है.

राज्यसभा सीट के लिए मायावती ने कांशीराम के सहयोगी रहे पार्टी के पूर्व विधायक भीमराव अंबेडकर को राज्यसभा भेजने का ऐलान किया. भीमराव उत्तर प्रदेश के इटावा के रहने वाले हैं. मायावती ने मंगलवार को राज्यसभा चुनाव की तैयारी के लिए विधायकों और पार्टी के प्रमुख नेताओं के साथ बैठक के बाद सबको चौंकाते हुए भीमराव अंबेडकर के नाम की घोषणा कर दी. जहां तक बसपा के घोषित राज्यसभा प्रत्याशी भीमराव अंबेडकर की बात है तो वह पार्टी प्रमुख मायावती के करीबी नेताओं में से एक हैं. मौजूदा समय में वो कानपुर मंडल के जोनल को-ऑर्डिनेटर हैं. वह बसपा के संस्थापक कांशीराम के समय से ही पार्टी में सक्रिय भूमिका में है. उनका नाम पार्टी के मिशनरी कार्यकर्ताओं में उनका नाम आता है.

भीमराव पेशे से वकील हैं. 2007 में वो इटावा के लखना विधानसभा सीट से चुनाव जीत कर पहली बार विधायक बने थे. उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों के लिए चुनाव होने हैं. उनके नाम की घोषणा कर के मायावती जहां पार्टी के जमीनी कार्यकर्ताओं को साकारात्मक संदेश देने में सफल रही हैं तो वहीं भाजपा द्वारा दलितों को अपने पाले में करने की कोशिशों को भी झटका दे दिया है.

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