संकल्प भूमि के 100 साल होने पर वडोदरा जाएंगी मायावती!

Mayawati

लखनऊ। बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती सितंबर महीने की 23 तारीख को वडोदरा जा सकती हैं. वडोदरा में मायावती के सियाजी पार्क स्थित संकल्प भूमि पर जाने की खबर है. असल में बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर ने 23 सितंबर 1917 को ही पारसी धर्मशाला से निकाले जाने के बाद सियाजी पार्क में रात काटी थी. घटना के सौ साल पूरा होने के मौके पर बसपा प्रमुख के वडोदरा दौरे की चर्चा है.

गुजरात में बसपा के पदाधिकारियों ने इस बारे में बहन मायावती से निवेदन किया है और मायावती ने उन्हें कार्यक्रम में पहुंचने का आश्वासन भी दिया है, हालांकि पार्टी ने अभी इसकी आधिकारिक घोषणा नहीं की है, लेकिन कयास तेज है कि बहनजी गुजरात पहुंचेगी.

भारत के इतिहास में या यूं कहे कि बहुजन आंदोलन के इतिहास में 23 सितंबर 1917 का दिन बेहद खास है. ये वही दिन है, जिस दिन 26 साल का एक युवक अपनी भीगी आंखों से एक संकल्प ले रहा था. युवक के उस एक संकल्प ने लाखों दलितों शोषितों की जिंदगी बदल दी, या यूं कहें कि भारत का इतिहास बदल दिया. वह युवक थे बाबासाहेब डॉ. भीमराव अम्बेडकर और वह जगह गुजरात का वडोदरा था.

हुआ यह था कि वडोदरा रियासत से मिले स्कॉलरशिप से डॉ. अम्बेडकर विदेश में पढ़ने गए थे. दोनों के बीच करार यह था कि स्कॉलरशिप के बदले अम्बेडकर को वडोदरा रिसायत में कुछ समय तक काम करना था. इसी करार के तहत अम्बेडकर 23 सितंबर 1917 को बड़ोदरा पहुंचे. वहां रुकने के लिए वह सराय या होटल ढूंढ़ रहे थे, लेकिन उनकी जाति के बारे में जानकर कोई भी उन्हें जगह देने को तैयार नहीं था. आखिरकार एक पारसी धर्मशाला में उन्हें रुकने की जगह मिली.

लेकिन जैसे ही हिन्दुओं को मालूम चल गया कि पारसी के धर्मशाला में रुकने वाला भीमराव अम्बेडकर नाम का व्यक्ति दलित है. बस फिर क्या था, लोग पारसी के होटल के बाहर इकट्ठा हो गए और अम्बेडकर को होटल से बाहर निकालने की मांग करने लगे. आखिरकार अम्बेडकर को बेइज्जत होकर वहां से रात के वक्त ही होटल छोड़ना पड़ा. उनके पास रात को रुकने का ठिकाना नहीं था. उन्हें वहीं पास स्थित एक पार्क में रात काटनी पड़ी, लेकिन यह रात डॉ. अम्बडेकर के जीवन की सबसे भारी रात थी. उन्होंने सोचा कि जब मुझ जैसे विदेश में पढ़े लिखे व्यक्ति के साथ हिन्दू इस तरह से व्यवहार कर रहे हैं तो जो मेरे समाज के अशिक्षित और गरीब लोग हैं, उनके साथ कैसा सलूक होता होगा?

बस… फिर क्या था. उन्होंने संकल्प लिया कि वो अपना सारा जीवन वंचित और उपेक्षित समाज के लोगों के जीवन को सुधारने में लगाएंगे. वडोदरा के जिस सियाजी पार्क में बाबासाहेब ने यह संकल्प लिया था, उसे संकल्प भूमि के नाम से जाना जाता है. हर साल वहां देश भर से अम्बेडकरवादी इकट्ठा होते हैं. आगामी 23 सितंबर को इस घटना के 100 साल पूरे हो रहे हैं. खबर है कि सौंवे साल में बाबासाहेब को श्रद्धांजलि देने के लिए बसपा अध्यक्ष मायावती भी वडोदरा पुहंच सकती हैं.

संबंधित वीडियो देखने के लिए यहां क्लिक करें

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.