सवर्णों के बंद पर मायावती ने चुप्पी तोड़ी, बनाया यह मास्टर प्लॉन

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नई दिल्ली। 6 अगस्त को सवर्ण समाज के बंद को लेकर बसपा सुप्रीमों सुश्री मायावती ने अपनी चुप्पी तोड़ दी है. मायावती ने इस बंद के बहाने ओबीसी और सवर्ण समाज को अपने पाले में करने की कोशिश शुरू कर दी है. अपने बयान के दौरान वह सवर्ण जातियों का नाम लेने से सीधे तौर पर बचती रहीं और बंद को भाजपा और आरएसएस का जातिवादी व चुनावी षड़यंत्र बताया. उन्होंने भाजपा पर सवाल दागते हुए कहा कि जिस प्रकार से बीजेपी एण्ड कम्पनी के लोग एस.सी-एस.टी. कानून का विरोध कर रहे हैं, पूर्व में उसी प्रकार का तीव्र विरोध इन्होंने ओ.बी.सी. वर्ग को सरकारी नौकरियों व शिक्षा आदि में 27 प्रतिशत आरक्षण देने के विरुद्ध भी किया था, जब बसपा की कोशिशों से देश में मण्डल आयोग की सिफारिशों को 1990 में लागू किया गया था.

सवर्ण समाज पर डोरे डालते हुए बसपा प्रमुख ने कहा कि बी.एस.पी. सर्वसमाज के हित का ध्यान रखने वाली पार्टी है और इसीलिये देश में सबसे पहले अपरकास्ट समाज के ग़रीबों को आर्थिक आधार पर आरक्षण देने के लिये केन्द्र सरकार को चिट्ठी लिखी तथा संसद के भीतर व संसद के बाहर भी लगातार इसके लिये संघर्ष भी करती रही हैं. यूपी की पूर्व मुख्यमंत्री ने बीजेपी सरकारों द्वारा प्रायोजित बंद को जनता के असली ज्वलन्त मुद्दों पर से सरकार का ध्यान बांटने का प्रयास कहा.

हालांकि बसपा प्रमुख ने एससी-एसटी कानून को लेकर सवर्ण समाज में फैले भ्रम को भी दूर करने की कोशिश की. उन्होंने कहा –
“जो लोग इस कानून की बहाली को लेकर अपने दिल व दिमाग में यह गलत धारणा बनाये हुये हैं कि अब इस कानून का ‘‘दुरूपयोग’’ होगा और अब इस कानून की बहाली की आड़ में दलितों व आदिवासियों को छोड़कर बाकी अन्य सभी समाज के लोगों का बड़े पैमाने पर ‘‘शोषण व उत्पीड़न’’ आदि होगा तो इससे हमारी पार्टी कतई भी सहमत नहीं है क्योंकि इस कानून का दुरूपयोग होना व ना होना, यह सब कुछ केन्द्र व राज्य सरकारों की खासकर एस.सी.-एस.टी. वर्गों के प्रति उनकी सही व ईमानदार सोच, नीति, नियत व कार्य-प्रणाली आदि पर ही निर्भर करता है.

और इस बात का खास सबूत, उत्तर प्रदेश में बी.एस.पी. के नेतृत्व में, वहाँ का चार बार का रहा हमारा ‘‘सही व ईमानदार, जातिविहीन व सर्वजन हिताय व सर्वजन सुखाय’’ की नीतियों पर आधारित शासनकाल का होना रहा है जिसमें इस कानून का बिल्कुल भी दुरूपयोग नहीं होने दिया गया था.

बसपा प्रमुख ने आरोप लगाया कि भारत बंद बीजेपी व आर.एस.एस. का जातिवादी व अपने राजनैतिक स्वार्थ एवं लाभ के लिये किया गया कोरा चुनावी षडयंत्र है. क्योंकि बन्द का ज्यादातर असर हमें उन्हीं राज्यों में देखने के लिये मिला है जिन राज्यों में बीजेपी की अकेले या फिर बीजेपी व इनके सहयोगी दलों की मिली-जुली सरकारें चल रही हैं. कुल मिलाकर एससी-एसटी एक्ट के कारण भाजपा से नाराज चल रहे सवर्णों को मायावती अपने शासनकाल की याद दिलाते हुए अपने पाले में करने की कोशिश में जुट गई हैं तो वहीं पिछड़े वर्ग को मंडल कमीशन की रिपोर्ट लागू करने के दौरान सवर्णों के गुस्से की याद दिलाकर भाजपा से दूर रहने का संदेश दे दिया है.

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