लालू की सज़ा पर गरमाई सियासत

रांची। 3 जनवरी से टलते टलते आखिरकार 6 जनवरी को चारा घोटाला मामले पर लालू प्रसाद यादव को सज़ा सुनाई गई. राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव को बतौर सजा साढ़े तीन साल की जेल औऱ 5 लाख का ज़ुर्माना भुगतना होगा. सज़ा के सदमें से अब तक लालू बाहर नहीं आ पाए थे कि अगले दिन ही उन्हे इकलौती बड़ी बहन गंगोत्री देवी के निधन की सूचना मिली, जिसे सुनकर निराश लालू अपने आँसू नहीं रोक पाए. माना जा रहा है कि बहन की मौत के बाद लालू को पेरौल पर जेल से बाहर आने की इजाज़त मिल सकती है.

लालू प्रसाद यादव की सज़ा के ऐलान के बाद से ही देशभर में बयानबाज़ी शुरू हो गई है. एक तरफ जहां विपक्ष ने मौके का फायेदा उठाते हुए लालू पर जमकर निशाना साधा वहीं दूसरी तरफ कई हस्तियाँ लालू का समर्थन करती नज़र आईं. इस मामले में उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव का कहना है कि बीजेपी ने उनके साथ अन्याय किया है.

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व कानून मंत्री अश्विनी कुमार भी लालू के समर्थन में सामने आए और कहा कि चारा घोटाला मामले में राजद प्रमुख लालू प्रसाद के खिलाफ निचली अदालत का फैसला अंतिम नहीं है और वह जमानत के हकदार है. लालू के जन सेवा के लम्बे रिकार्ड को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है.

इतना ही नहीं कांग्रेस ने साफ किया कि लालू के जेल जाने से गठबंधन पर कोई असर नहीं पड़ेगा. कांग्रेस नेता आरपीएन सिंह का कहना है कि र्टी ने हमेशा भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाई है। जहां तक गठबंधन का सवाल है, वह आरजेडी के साथ है, किसी व्यक्ति के साथ नहीं। इस सब से जाहिर है कि लालू जेल में ही क्यों न हों, बिहार की राजनीति और पार्टी में उनका दबदबा अभी भी कायम है.

पीयूष शर्मा

 

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