बजट के पहले आम आदमी के मतलब से जुड़ी ये 12 बातें जानिए

नई दिल्ली। एक फरवरी को सरकार देश का आम बजट पेश करेगी. आमतौर पर देश के मतदाताओं को बजट के मायने समझ नहीं आते. आम भाषा में कहें तो ‘सर के उपर से’ गुजर जाते हैं. बजट में सरकार ने क्या कहा, यह सिर्फ चुनिंदा बड़े लोगों, अर्थशास्त्र के जानकारों और चार्टर्ड एकाउंटेंट के ही समझ में आता है. लेकिन कुछ बातें ऐसी भी होती हैं, जिनका आम आदमी का समझना काफी जरूरी है. हम यहां आपको कुछ ऐसी ही चीजों को बारे में बताएंगे ताकि यह बजट आपके लिए सर के उपर से गुजरने वाली एक घटना बनकर न रह जाए.

फाइनेंसियल इयर: इसका मतलब वित्तीय साल होता है, जो कि 1 अप्रैल से शुरू होकर 31 मार्च तक चलता है.

Assessee: ऐसा व्यक्ति जो इनकम टैक्स एक्ट के तहत टैक्स भरने के लिए उत्तरदायी होता है.
डायरेक्ट टैक्स: यह वह टैक्स होता है, जो किसी भी व्यक्ति व संस्थान की कमाई और उसके स्रोत पर लगता है. इनकम टैक्स, कॉरपोरेट टैक्स, कैपिटल गेन टैक्स और इनहेरिटेंस टैक्स इस कैटेगरी में आते हैं.

इन डायरेक्ट टैक्स: यह टैक्स उत्पादित वस्तुओं पर लगने वाला टैक्स होता है. इसके अलावा यह टैक्स आयात-निर्यात वाले सामान पर उत्पाद शुल्क, सीमा शुल्क और सेवा शुल्कट के रूप में भी लगाया जाता है.

कैपिटल असेट्स: जब कोई व्यक्ति किसी चीज में निवेश करता है या फिर खरीदारी करता है तो इस रकम से खरीदी गई प्रॉपर्टी कैपिटल एसेट कहलाती है. यह बॉन्ड, शेयर मार्केट और रॉ मैटेरियल में से कुछ भी हो सकता है.

एकजेंप्शन (Exemption): टैक्स देने वाले देश के आम लोगों की वह आमदनी जो टैक्स के दायरे में नहीं आती. यानी जिस पर कोई टैक्स नहीं लगता.

Assessment Year: यह कर निर्धारण का साल होता है, जो किसी वित्तीय साल का अगला साल होता है. जैसे 1 अप्रैल 2015 से 31 मार्च 2016 अगर वित्तीय वर्ष है तो कर निर्धारण वर्ष 1 अप्रैल 2016 से 31 मार्च 2017 तक होगा.

Finance Bill: इस विधेयक के माध्यम से ही आम बजट पेश करते हुए वित्तमंत्री सरकारी आमदनी बढ़ाने के विचार से नए करों आदि का प्रस्ताव करते हैं. इसके साथ ही वित्त विधेयक में मौजूदा कर प्रणाली में किसी तरह का संशोधन आदि को प्रस्तावित किया जाता है. संसद की मंजूरी मिलने के बाद ही इसे लागू किया जाता है.

जीटीपी (GDP): इसी को सकल घरेलू उत्पाद कहते हैं. यह एक वित्त वर्ष के दौरान देश के भीतर कुल वस्तुओं के उत्पादन और देश में दी जाने वाली सेवाओं का टोटल होता है.

बजट डेफिसिट (Budget deficit): जब खर्चा सरकार के राजस्व से ज्यादा हो जाता है, उस स्थि‍ति को बजट घाटा कहते हैं.

एक्साइज ड्यूटी: एक्साइज ड्यूटी अथवा उत्पाद शुल्क वह शुल्क होता है, जो देश के भीतर बनने वाले उत्पादों पर लगाया जाता है. यह कस्टम ड्यूटी से अलग होता है.

कस्टम ड्यूटी: कस्टम ड्यूटी देश के बाहर से आने वाले उत्पादों पर लगाया जाता है. यह उत्पाद के प्रोडक्शन और खरीद पर लगता है.

बैलैंस बजट: जब सरकार का राजस्व मौजूदा खर्च के बराबर होता है, तो उसे बैलेंस बजट का नाम दिया जाता है.
डिस इनवेसमेंट (Disinvestment): जब सरकार द्वारा संचालित किसी कंपनी या संस्थान की हिस्सेदारी बेची जाती है, तो उसे विनिवेश कहा जाता है. इसका मतलब ये है कि सरकार अपने अधिकार वाली कंपनी में से हिस्सेदारी निजी कंपनियों या व्यक्ति को बेच देती है.

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