पाकिस्तान को लेकर भाजपा का चेहरा बेनकाब

गुजरातl जिस गुजरात चुनाव में भारतीय जनता पार्टी को कांग्रेस और राहुल गांधी के हमलों के बाद चुनाव में पाकिस्तान का सहारा लेना पड़ा, असल में उस पाकिस्तान की हमदर्द कांग्रेस नहीं बल्कि भाजपा है. भाजपा औऱ पीएम मोदी भले ही खुद को पाकिस्तान का दुश्मन घोषित कर उसका चुनावी लाभ लेते रहे हैं, लेकिन अंदर की हकीकत कुछ और है. प्रमुख हिन्दी अखबार दैनिक भास्कर में प्रकाशित एक खबर इसी ओर इशारा कर रही है.

 जैसी खबरें आती हैं, उसके मुताबिक पाकिस्तान के साथ बातचीत के सारे रास्ते बंद हैं. सीमा पर फायरिंग है. भारत के गृह मंत्रालय के मुताबिक पाकिस्तान ने इस साल 750 से ज्यादा बार संघर्ष विराम तोड़ा है. जबकि भारत सरकार पाकिस्तान से आने वाले लोगों को पैन कार्ड और आधार दे रही है. वे अब भारत के बैंकों में खाता खोल सकते हैं और यहां घर भी खरीद सकते हैं.

अखबार की खबर के मुताबिक मोदी सरकार पिछले साल से पाकिस्तान से विस्थापित होकर आने वाले हिन्दू, सिख एवं अन्य अल्पसंख्यक समुदायों के लोगों को आधार औऱ पैन कार्ड की सुविधा दे रही है. 2014 से लेकर अब तक 7200 से अधिक पाकिस्तानी नागरिकों को एलटीवी यानि दीर्घकालिक वीजा मिल चुका है. पाकिस्तान से हर साल 5000 हिन्दुओं के विस्थापित होने की खबर है. साथ ही सिख और अन्य धार्मिक अल्पसंख्यक समुदाय के लोग भी विस्थापित हो रहे हैं. यानि यह साफ है कि पाकिस्तान को लेकर भारत सरकार के दो पक्ष हैं. जिसमें एक वहां के धार्मिक अल्पसंख्यकों औऱ दूसरा वहां के मुसलमानों के लिए है. कहीं न कहीं ऐसे कदम उठा कर भाजपा शासित केंद्र सरकार देश में अपने वोटों को मजबूत करने में जुटी है.

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