बसपा से फिर निकाले गए दद्दू प्रसाद

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दद्दू प्रसाद

नई दिल्ली। बहुजन समाज पार्टी ने पूर्व कैबिनेट मंत्री दद्दू प्रसाद को एक बार फिर से बाहर का रास्ता दिखा दिया है. दद्दू प्रसाद को पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने का आरोप लगा कर निकाला गया है. इससे पहले 28 जनवरी 2015 को भी बसपा सुप्रीमों ने उन्हें पार्टी से बाहर कर दिया था. लेकिन बाद में 28 मार्च 2017 को दिल्ली में बसपा सुप्रीमो मायावती के आवास पर उन्हें पुन: बसपा में शामिल कर लिया गया.

बांदा जनपद के मूल निवासी दद्दू प्रसाद कांशीराम जी से प्रभावित रहे हैं. वह खुद को कांशीरामवादी कहते रहे हैं. कांशीराम जी से प्रभावित होकर ही वो बसपा में शामिल हो गए थे. बसपा की पांच साल की सरकार में वह कैबिनेट मंत्री थे. साथ ही बुंदेलखंड सहित कई राज्यों के प्रभारी भी रहे. दद्दू प्रसाद पार्टी की रणनीति में बदलाव के पक्षधर रहे हैं. इसलिए वह फिर से खटकने लगे थे.

इसके बाद 10 जनवरी को बसपा के बांदा जिलाध्यक्ष ने प्रेस नोट जारी कर दद्दू प्रसाद को बसपा से निष्कासित करने की सूचना दी. उन पर आरोप लगाया गया कि वह अपने को पार्टी का बड़ा नेता बताकर बसपा के पदाधिकारियों और समर्थकों को गुमराह कर रहे हैं. पार्टी ने प्रेस नोट जारी कर कहा है कि दद्दू प्रसाद का बसपा से कोई लेना-देना नहीं है. बसपा कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों से कहा गया है कि वह दद्दू प्रसाद से कोई संबंध रखें. न ही पार्टी के कार्यक्रमों या बैठकों में बुलाएं.

अपने निष्काषन पर दद्दू प्रसाद ने दलित दस्तक से बात करते हुए कहा कि मैं 28 मार्च 2017 को बसपा को बचाने वापस गया था. बसपा मेरे खून पसीने और श्रम से बनी है. मैं सामाजिक परिवर्तन के आंदोलन के लिए काम करता रहूंगा. बाबासाहेब अम्बेडकर और कांशीराम जी के मिशन के लिए काम करता रहूंगा. उन्होंने आरोप लगाया कि बसपा के अंदर के लोग पार्टी को बचाना नहीं चाहते हैं और जो पार्टी को आगे बढ़ाना चाहता है, उसे निकाल दिया जा रहा है.

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