चंद्रशेखर रावण की जमानत को लेकर पूर्व न्यायाधीशों ने लिखा सीएम योगी को खत

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Bhim Army founder Chandrashekhar Azad 

नई दिल्ली। सहारनपुर मामले में हिंसा फैलाने के आरोप में जेल में बंद भीम आर्मी के प्रमुख चंद्रशेखर आजाद रावण की रिहाई को लेकर देश के तीन पूर्व न्यायाधीश सामने आ गए हैं. सिटिजंस फॉर जस्टिस एंड पीस नाम के नागरिक अधिकार संगठन की ओर से पूर्व न्यायाधीश सहित नौ सिविल राइट एक्टिविस्ट ने यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर चंद्रशेखर के खिलाफ सभी आरोपों को खारिज करने और उन्हें ज़मानत देने की मांग की है. साथ ही उनके बिगड़ते स्वास्थ को लेकर चिंता जताई है. पत्र की एक कॉपी गृहमंत्री राजनाथ सिंह औऱ राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को भी भेजी गई है.

पत्र में चंद्रशेखर रावण के एनएसए की अवधि को बढ़ाने को लेकर हैरानी जताई गई है. पत्र में चंद्रशेखर आजाद पर बेबुनियाद इल्ज़ाम लगाए जाने की बात कही गई है. साथ ही यह भी कहा गया है कि रावण पर राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम रासुका के तहत आरोप थोपे जा रहे हैं. पत्र में इस बात को लेकर भी विरोध जताया गया है कि सरकार की तरफ से रासुका का आदेश उस वक्त आया जब उन्हें ज़मानत मिल चुकी थी और वह रिहा होने वाले थे.

सिविल राइट्स एक्टिविस्ट के ग्रुप ने पत्र में चंद्रशेखर रावण के स्वास्थ को लेकर चिंता जताते हुए कहा है कि अगर चंद्रशेखर रावण को कुछ होता है तो इसकी जिम्मेदारी यूपी के सीएम और गृहमंत्री की होगी. चंद्रशेखर पर लगे आरोपों का जिक्र करते हुए उन्होंने साफ किया है कि भीम आर्मी द्वारा किया गया विरोध प्रदर्शन इतना गंभीर नहीं था जिसके लिए एनएसए लागू किया जाए. और यह नागरिक अधिकार कार्यकर्ताओं और वरिष्ठ न्यायाधीशों का भी मानना है. इस पत्र में भीम आर्मी द्वारा बच्चों के लिए 350 से ज्यादा स्कूल चलाने का भी जिक्र किया गया है, जिसे पिछले 9 महीनों से सरकार ने जबरन बंद करवा दिया है.

सरकार के नाम लिखे इस पत्र में सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज जस्टिस पी बी सावंत, रिटायर्ड हाई कोर्ट जज जस्टिस बी जी कोलसे पटिल, रिटायर्ड हाई कोर्ट जज जस्टिस होसबेट सुरेश, सीजेपी सचिव तीस्ता सितलवार, भीम आर्मी डिफेंस कमेटी के संयोजक प्रदीप नरवाल, लेखक एवं कार्यकर्ता राम पुनियानी, पत्रकार जावेद आनंद, एकैडेमिक मुनीज़ा खान और ग्लोकल यूनीवर्सिटी के प्रोफेसर खालिद अनिस अंसारी ने हस्ताक्षर किया है. इन सबने चंद्रशेखर आज़ाद रावण को तुरंत ज़मानत पर रिहा करने की मांग की है.

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