दलित रसोइयां के हाथ से बना मिड-डे-मील नहीं खा रहे बच्चे

छ्त्तीसगढ़

गरियाबंद। देश में जातिवादी मानसिकता का बीज इस कदर बोया जा रहा है कि नादान बच्चे भी इसका शिकार हो रहे हैं. कुछ इस तरह का मामला छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले से आया है. जहां आंगनवाड़ी के बच्चे दलित महिला रसोइयां के हाथ से बना खाना खाने से मना कर रहे हैं. इस कारण आंगनवाड़ी में अब भोजन बनाना बंद कर दिया गया है. यहां अब बच्चों को सिर्फ गुड़ और चना दिया जा रहा है.

दरअसल, गरियाबंद जिले के देवभोग ब्लॉक स्थित ध्रुवापारा के आंगनवाड़ी केंद्र में एक दलित महिला के हाथ से पका भोजन बच्‍चे नहीं खा रहे हैं. दलित महिला के हाथ से पका भोजन नहीं खाने की जानकारी आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं ने महिला बाल विकास विभाग को भी दी है. लेकिन अब तक विभाग ने न तो कोई पहल की है और न ही कोई कार्रवाई. इसके चलते यहां आज भी गर्म भोजन के बजाय बच्‍चों को चना और गुड़ खिलाकर उनका कुपोषण दूर करने का प्रयास किया जा रहा है.

शुरुआती दौर में आंगनवाड़ी केंद्र में पदस्‍थ सहायिका ने भोजन बनाकर बच्चों को खिलाने की कोशिश की तो बच्चे भोजन को खाने के बजाय फेंक देते थे. उसने एक सप्ताह तक भोजन बनाया लेकिन बच्चों ने खाने से मना कर दिया. इस पर आंगनवाड़ी कार्यकर्ता कल्याणी सिन्हा और सहायिका ने एक महिला को पैसे देकर भोजन बनवाना शुरू किया लेकिन उन्‍हें इसके लिए अपने पास से भुगतान करना पड़ता था. लिहाजा कुछ समय बाद यह व्‍यवस्‍था भी बंद कर दी गई‍. अब बच्चों को चना और गुड़ दिया जा रहा है.

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