बिहार बसपा में घमासान

नई दिल्ली। बहुजन समाज पार्टी की बिहार इकाई से बड़ी खबर है. बिहार के प्रभारी तिलक चंद्र अहिरवार ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया है. अहिरवार बिहार और झारखंड के प्रभारी थे. हालांकि 28 जनवरी को पार्टी का कहना है कि अहिरवार को निकाल दिया गया है. अहिरवार के बाद अब बिहार में कुछ समय तक उनके जूनियर रहे लालजी मेधंकर को दुबारा बिहार प्रदेश भेज दिया गया है. मेधंकर को पिछले साल अहिरवार से मतभेद के बाद बिहार से हटा लिया गया था. कुछ दिनों तक राजनीतिक वनवास काटने के बाद मेधंकर को पार्टी ने तीन महीने पहले ही राजस्थान के उदयपुर और आस-पास की जिम्मेदारी दी थी. अब अहिरवार के पार्टी छोड़ने के बाद मेधंकर उनकी जगह लेंगे.

तिलक चंद्र अहिरवार पिछले तीन दशक से बसपा से जुड़े हुए थे. बसपा की बुंदेलखंड की राजनीति में तिलक चंद्र अहिरवार कद्दावर नाम है. पार्टी ने उन्हें विधान परिषद में भेजा था. फिर विधानसभा का चुनाव भी लड़ाया था. इसके अलावा पिछले साल उन्हें बुंदेलखंड प्रभारी भी बनाया गया था. लेकिन अप्रैल 2016 में उनसे बुंदेलखंड का प्रभार छीन लिया गया था. पांच महीने पार्टी गतिविधियों से दूर रहने के बाद सितंबर 2016 में बसपा अध्यक्ष मायावती ने एक बार फिर उनपर भरोसा जताते हुए उन्हें बुंदेलखंड व कानपुर मंडल का जोन कोआर्डिनेटर बनाया था. फिलहाल अहिरवार के पास बिहार और झारखंड के प्रभारी की जिम्मेदारी थी.

पार्टी छोड़ने के बाद बसपा की ओर से जारी बयान में अहिरवार पर आरोप लगाया गया है कि बसपा सुप्रीमो ने तिलकचन्द्र अहिरवार को बिहार-झारखंड की ज़िम्मेदारी दी थी लेकिन उन्होंने इस ज़िम्मेदारी को सही से नहीं निभाया और 2019 के लोकसभा चुनाव के लिये यूपी के जालौन-गरौठा-भोगनीपुर सीट पर चिंतित थे. पार्टी ने उनपर मेंबरशिप फीस को जमा न करने का भी आरोप लगाया है. जबकि बिहार के पार्टी कार्यकर्ताओं और बामसेफ से जुड़े लोगों से आ रही खबर के मुताबिक इस पूरे घटनाक्रम को बिहार में होने वाले उपचुनाव से जोड़कर देखा जा रहा है.

बिहार में जल्दी ही लोकसभा की एक और विधानसभा की दो खाली सीटों पर उप चुनाव होने वाला है. इन तीनों सीटों पर दलित समाज का मत निर्णायक है. इनमें से एक भभुआ विधानसभा की सीट पर प्रदेश प्रभारी की हैसियत से शीर्ष नेतृत्व को सूचित करने के बाद अहिरवार ने पार्टी के पुराने कार्यकर्ता और प्रदेश अध्यक्ष भरत बिंद का टिकट फाइनल कर दिया था. बिंद ने चुनाव प्रचार भी शुरू कर दिया था लेकिन ऐन वक्त पर बिंद का टिकट काटकर बिना प्रदेश कार्यकारिणी से सलाह किए लखनऊ से ही किसी दूसरे का टिकट फाइनल कर दिया गया.

अहिरवार इससे काफी निराश थे, जिसके बाद उन्होंने पार्टी से इस्तीफा दे दिया. अहिरवार के इस अचानक इस्तीफे के बाद बिहार बामसेफ के लोग भी हैरत में हैं. तो वहीं खबर यह भी आ रही है कि जल्दी ही अहिरवार के क्षेत्र बुंदेलखंड में बसपा को बड़ा झटका लग सकता है. आने वाले 15-20 दिनों में अहिरवार के समर्थन में 5000 से ज्यादा लोग बसपा छोड़ सकते हैं.

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