केसरिया बौद्ध स्तूप की अनदेखी को लेकर बौद्ध संगठनों ने लिखा राष्ट्रपति को पत्र

चम्पारण। बिहार के चम्पारण में स्थित विश्व का सबसे ऊंचा केसरिया बौद्ध स्तूप सुरक्षा एवं संरक्षण के अभाव में नष्ट हो रहा है. बौद्ध संगठनों की राष्ट्रीय समन्वय समिति, बुद्धगया के राष्ट्रीय संगठक आशाराम गौतम ने केसरिया बौद्ध स्तूप की सुरक्षा एवं संरक्षण को लेकर भारत के राष्ट्रपति, बिहार के मुख्यमंत्री केंद्र सरकार के सांस्कृतिक मंत्री, पर्यटन मंत्री, जनशिकायत मंत्री, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के महानिदेशक, राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष और कई संबंधित विभागों को याचिका पत्र भेजी गई है.

इस याचिका पत्र में समिति ने 6 सदस्यी भ्रमण रिपोर्ट को आधार बनाकर केसरिया बौद्ध की कुछ तस्वीरों भी भेजी हैं. इन तस्वीरों में केसरिया बौद्ध स्तूप की दुर्दशा का साफ पता चला रहा है. अपने भ्रमण में बौद्ध प्रतिनिधिमंडल ने देखा कि दुनिया के सबसे ऊंचे केसरिया बौद्ध स्तूप के अस्तित्व पर संकट छाया हुआ है. तेज बारिश एवं धूप के कारण केसरिया बौद्ध स्तूप की दीवारें एवं ईंटें गिर रही हैं. केसरिया बौद्ध स्तूप की सुरक्षा व संरक्षण में तैनात भारतीय पुरातत्व विभाग के अधिकारियों की लापरवाही, असंवेदनशीलता के कारण केसरिया स्तूप के दक्षिणी हिस्से में जंगल एवं झाड़ियां उग आई हैं जिससे बारिश का पानी स्तूप में जा रहा है, जो कि स्तूप की दीवारों को कमजोर करता जा रहा है, जिससे मिट्टी ढह रही है और केसरिया बौद्ध स्तूप नष्ट हो रहा है. देश की प्राचीन विरासत केसरिया बौद्ध स्तूप के अस्तित्व को भयंकर खतरा पैदा हो गया है.

गौतम ने याचिका में कहा है कि बिहार राज्य के पूर्वी चम्पारण जिले के गन्डक नदी के तट पर मोतिहारी से 35 किलोमीटर दूर ‘साहेबगंज-चकिया मार्ग’ पर केसरिया बौद्ध स्तूप स्थित है. बौद्ध धर्म के इतिहास में केसरिया बौद्ध स्तूप का प्रमुख स्थान है. कहा जाता है कि महापरिनिर्वाण के समय भगवान बुद्ध ने वैशाली से कुशीनगर जाते समय एक रात केसरिया में गुजारी थी और लिच्छवियों को अपना भिक्षापात्र प्रदान किया था.

पुरातत्ववेत्ताओं के अनुसार केसरिया बौद्ध स्तूप दुनिया में सबसे ऊंचा बौद्ध स्तूप है. यह स्थान बिहार की राजधानी पटना से 120 किलोमीटर और वैशाली से 30 किलोमीटर दूर है. मूलरूप से 150 फीट ऊंचे इस स्तूप की ऊंचाई सन् 1934 में आये भयानक भूकम्प से पहले 123 फीट थी, किन्तु वर्तमान समय में केसरिया बौद्ध स्तूप की ऊँचाई 104 फीट है. बौद्ध जातक कथाओं में केसरिया बौद्ध स्तूप का वर्णन मिलता है. पर्यटन के साथ-साथ बौद्ध धम्म के इतिहास में केसरिया बौद्ध स्तूप का प्रमुख स्थान है. यहां आज भी प्रतिवर्ष लाखों बौद्ध तीर्थयात्री विश्व भर से दर्शन के लिए आते हैं

संगठन याचिका में विभिन्न सरकारी संस्थानों से अपी की है कि बौद्ध स्तूप के अस्तित्व को बचाने एवं स्थायी संरक्षण करने के लिए चारों तरफ “छायादार फाईबर शीट का प्लेटफार्म“ बनाकर केसरिया बौद्ध स्तूप को तेज बारिश एवं धूप से बचाया जाये. भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग की जमीन का गैरकानूनी अतिक्रमण एवं अवैध निर्माण किया गया है, उसको तत्काल रद्द किया जाये और आगे जो भू-अतिक्रमण किया जा रहा है उसे तत्काल रोका जाये. केसरिया बौद्ध स्तूप के दर्शन करने आने वाले देशी-विदेशी पर्यटकों, बौद्ध श्रद्धालुओं के लिए पर्याप्त सुलभ शौचालय, पीने के पानी की फिल्टर मशीन, खान-पान व्यवस्था एवं ‘पर्यटक गैस्ट हाऊस’ बनवाया जाये. देशी-विदेशी पर्यटकों की सुविधा के लिए बिहार राज्य के अन्दर सभी प्रमुख बौद्ध पर्यटन स्थलों विशेषकर तथागत बुद्ध की ज्ञानस्थली महाबोधि महाविहार बुद्धगया, नालंदा, राजगीर, पाटलीपुत्र (पटना), वैशाली, केसरिया बौद्ध स्तूप आदि पर्यटन स्थलों के दर्शन के लिए “वातानुकूलित पर्यटक बस सेवा” शुरू की जाये.

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