Das Publications


प्रकाशकों की भीड़ में “दास पब्लिकेशन” को शुरू करने की जरूरत सिर्फ इसलिए महसूस हो रही है क्योंकि हम अपने लेखन को सहेजना भर चाहते हैं। मासिक पत्रिका ‘दलित दस्तक’ की शुरुआत जून, 2012 में हुई थी। तब से लगातार यह आंदोलन जारी है। इन अंकों में अब तक तमाम दिग्गजों के हजार से ज्यादा महत्वपूर्ण आलेख प्रकाशित हो चुके हैं। किसी भी पत्रिका की एक उम्र होती है और नया अंक आने के बाद पुराने की सार्थकता कम होती जाती है। ऐसे बहुत कम लोग होते हैं जो पत्रिकाओं को हर महीने सहेज कर रख पाते हैं। इस तरह पत्रिकाओं के साथ तमाम महत्वपूर्ण आलेखों की सार्थकता भी समाप्त होती जाती है। “दास पब्लिकेशन” के जरिए हम बस इन्हीं लेखों को सहेजने निकले हैं। पत्रिका के संपादक मंडल के अहम सदस्य डॉ. विवेक कुमार ने अपने लेखों के जरिए मान्यवर कांशीराम के लिए ‘साहेब से मान्यवर’ और बाबासाहेब को राष्ट्रनिर्माता के तौर पर स्थापित करने का काम किया है। अपने लेखों के माध्यम से वरिष्ठ साहित्यकार आनंद श्रीकृष्ण ने तथागत के संदेश को पत्रिका के पाठकों के लिए प्रस्तुत किया है। ऐसे ही वरिष्ठ साहित्यकार जयप्रकाश कर्दम, वरिष्ठ पत्रकार शंभू भद्रा, एच.एल. दुसाध, अनिता भारती, डॉ. पूजा राय सहित दर्जनों जाने माने लेखकों ने दलित दस्तक के लिए लगातार लिखा है। ये तमाम लेख अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। इस तरह के तमाम अन्य आलेख भी हैं जो बिखरे पड़े हैं। दास पब्लिकेशन बस ऐसे ही तमाम विद्वानों के विचारों को सहेजने की दिशा में काम करने का एक जरिया बनेगी। आने वाले दिनों में हम ऐसे ही विभिन्न विषयों पर आधारित लेखों को संग्रहित कर पाठकों के सामने लेकर आएंगे साथ ही कुछ ऐसी जानकारियां भी मुहैया कराएंगे जो अब तक समाज की मुख्यधारा की नजरों से ओझल रही है। हम अपने पाठकों से वादा करते हैं कि हम जो भी करेंगे, सार्थक करेंगे। ‘दास पब्लिकेशन’ को आपके स्नेह की जरूरत है, उम्मीद है मिलेगा।


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