मेरठ के शोभापुर गांव में 70 फीसदी दलितों पर एफआईआर

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शोभापुर गांव में पसरा सन्नाटा

मेरठ। दो अप्रैल को दलितों के बंद के बाद मेरठ और हापुड़ में स्थिति काफी खतरनाक हो गई है. स्थानीय लोगों का आरोप है कि पुलिस देर रात घर में घुसकर पुरुषों को उठाकर ले जा रही है. कई लोगों को झूठे मामले में भी फंसाने की शिकायत है. इसको लेकर मेरठ में महिलाओं ने प्रदर्शन कर अपना विरोध जाहिर किया था. इस बीच मेरठ के शोभापुर गांव में रहने वाले दलित गिरफ्तारी और हत्या के डर से अपने घर छोड़कर पलायन कर रहे हैं.

इन्हें डर है कि एससी/एसटी एक्ट में बदलाव के विरोध में बंद के दौरान हुई हिंसा से जुड़े मामलों में झूठे तरीके से फंसाया जा सकता है. गांव के करीब 2000 पुरुष और लड़के यहां से पलायन कर गए हैं. इन सभी को आशंका है कि अगर वे अपने घरों पर रहे तो या तो उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाएगा या हत्या कर दी जाएगी. उनका कहना है कि दलित होने की वजह से उन्हें पलायन करना पड़ा है.

2 अप्रैल को मेरठ में हिंसक घटनाओं के बाद पुलिस पर दलितों के उत्पीड़न के आरोप लग रहे हैं. गांव में दलितों के घरों के दरवाजों पर ताले लटके हुए हैं और दुकानों के शटर गिरे हुए हैं और स्कूलों के दरवाजे बंद हैं. गांव में पसरा सन्नाटा साफ नजर आता है.

गौरतलब है कि 2 अप्रैल को मेरठ में दलितों के विरोध प्रदर्शन के दौरान शोभापुर से भी दंगे और आगजनी के मामले रिपोर्ट हुए थे. इसके अगले दिन ही गांव के एक दलित युवक गोपी की गोली मार कर हत्या कर दी गई थी जिसका आरोप दूसरे समुदाय के लोगों पर लगा. पुलिस लिस्ट में ऐसे कई लोगों के भी नाम हैं जो कथित तौर पर हिंसा वाले दिन मौके पर मौजूद ही नहीं थे. उन्हें भी आरोपी बना दिया गया है. कई लोग इस बाबत सबूत लेकर पुलिस वालों को बता रहे हैं लेकिन पुलिस उनकी बात सुनने को तैयार नहीं है.

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